भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का इतिहास, महत्त्व, नियम हिंदी में

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का इतिहास और महत्त्व एवं नियम


भारत अपना 75 वा स्वतंत्र दिवस मनाने जा रहा है जिसे हम अमृत महोत्सव के नाम से सेलिब्रेट कर रहे है। जिसमे हम अपने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को लहरा रहे है ऐसे में हमे इसके बारे में जानकारी होना ही चाहिए हमे भारतीय राष्ट्र ध्वज

तिरंगे का महत्व क्या है? इसको समझना चाहिए तिरंगे का इतिहास हमे ज्ञात होना चाहिए तिरंगे को किसने बनाया था वा यह कैसे बनाया गया था तिरंगे में तीन रंगों का क्या मतलब है ये सभी चीज अगर आपको ज्ञात होगी तो आप तिरंगे को एक अलग ही सम्मान की नजरिए से देख पाओगे आप इसका सम्मान सही से कर पाओगे इसीलिए प्रत्येक भारतीय का यह फर्ज बनता है की वहा अपने भारतीय राष्ट्र ध्वज तिरंगे के बारे में जाने वा उसके नियम सीखे ताकि उसका सम्मान कर पाए।


तिरंगा हर भारतीय की आन बान और शान है यह फर्क नहीं पड़ता की आप किस देश में हो अपने देश के राष्ट्र ध्वज को देखकर आपके मन में एक अपने देश के प्रति सम्मान और प्रेम का भाव उत्पन्न होता है। तिरंगा हर भारतीय के लिए महत्वपूर्ण है। हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है की वहा तिरंगे के बारे में जानकारी रखे इसका सम्मान करना सीखे इसके नियम भी जाने इसी लिए हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से आपको तिरंगे के बारे में सभी आवश्यक जानकारी देगे जो की आपको जरूर जननी चाहिए इसीलिए आपको कुछ समय निकालकर इस आर्टिकल को पूरा पड़ना चाहिए।


Tiranga ka mahatva itihash aur niyam



    भारतीय राष्ट्र ध्वज तिरंगे का महत्व (tiranga ka mahatva)

    “तिरंगा” भारत का राष्ट्र ध्वज है। यह हर भारतीय के लिए महत्वपूर्ण है तिरंगा देश के प्रति हमारे कर्तव्य की हमे याद दिलाता है और हमारे दिल में राष्ट्रीय एवं देशभक्ति की भावना का आव्हान करता है हम सभी भारतीय तिरंगे से जुड़े हुए है यह हमारा एक भाव है जो देश प्रेम को समर्पित है यह हमारे वीरो के बलिदान की याद दिलाता है। तिरंगे को लहरा देख हर भारतीय के मन में अलग ही उत्साह जाग उठता है। तिरंगा केवल एक ध्वज ही नही बल्कि एक उत्साह है जो की हमे हमारे देश को बेहतर बनाने के लिए सैनिकों को देश के प्रति विपरित परिस्थितियों में डटे रहने के लिए प्रेरित करता है। ऐसे ही कई सारे महत्व हमारे लिए भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के है हम इसका हर पल सम्मान करते आए है हम इसी से जुड़े हुए है।


    अगर हम तिरंगे के महत्व को कम शब्दों में समझे तो वो कुछ इस प्रकार होगे –


    1. भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा देश की स्वतंत्रता को दर्शाता है।
    2. राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा देश की अखंडता को प्रदर्शित करता है।
    3. तिरंगा देश के गौरव का प्रतीक माना जाता है।
    4. राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भारतीयों में देशभक्ति की भावना को जगाता है।
    5. तिरंगा सभी भारतीयों को एकजुट करता है।
    6. राष्ट्रीय ध्वज में देश की संस्कृति सभ्यता वा इतिहास दिखाई देता है।
    7. भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा विविधता में एकता को प्रदर्शित करता है।
    8. हम राष्ट्रीय पर्व मनाने के लिए तिरंगे को फहराते हैं।
    9. तिरंगा देश के सामान्य नागरिकों में देशभक्ति की भावना उत्पन्न करता है वह उन्हें देशभक्ति की ओर प्रेरित करता है।
    10. राष्ट्रीय ध्वज देश का प्रतीक है।


    भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का इतिहास (tiranga ka itihas)

    दुनिया के सभी स्वतंत्र राष्ट्र का अपन राष्ट्र ध्वज है। जो की एक स्वतंत्र देश का प्रतीत होता है. 15 अगस्त 1947 अंग्रेज से आजादी के कुछ दिन पहले 22 जुलाई 1947 में हुई सविधान सभा की बैठक के दौरान राष्ट्रीय ध्वज को उसके वर्तमान स्वरूप में अपनाया गया । भारत में “तिरंगा” शब्द भारतीय राष्ट्र ध्वज को संदर्भित करता है। 


    स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंक्या ने भारत के वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज का डिजाइन किया था इस झंडे में 2 बैंड थे एक लाल और दूसरा हरा रंग का जिसमे उस समय लाल रंग हिंदू समुदाय और हरा रंग मुस्लिम समुदाय को दरसाता था। लाला हंसराज की सिफारिश पर गांधीजी ने इसमें एक सफेद पट्टी और चरखा जोड दिया सफेद पट्टी “शांति” और चरखा आत्मनिर्भरता की प्रतीक थी 1913 में कराची में कांग्रेस समिति ने लाल रंग को बदलकर केसरी कर दिया और रंगो के क्रम में भी बदलाव किया । इस झंडे में सबसे उपर केशरी बीच में सफेद और नीचे हरे रंग की पट्टी थी सफेद पट्टी में चरखा बना हुआ था बाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर इस झंडे को स्वीकार कर लिया। आजादी के बाद एक राष्ट्रीय झंडा समिति का गढ़न हुआ जिसमे राजेंद्र प्रसाद को इसका अध्यक्ष बनाया गया इस समिति ने बदरुद्दीन तेय्यबजी और सुरैया तेय्यबजी की सलहा पर इसमें सफेद पट्टी से चरखे को हटा कर उसकी जगह अशोक चक्र को जोड़ा गया 22 जुलाई 1947 की बैठक में राष्ट्रीय ध्वज को इसके वर्तमान स्वरूप में अपनाया गया।


    Pingali Venkayya (पिंगली वेंकैया) को भारत के राष्ट्र ध्वज का डिजाइनर कहा जाता है क्योकी उन्होंने वाला ध्वज बनाया था जिसपर वर्तमान राष्ट्र ध्वज आधारित है वहा एक स्वतंत्रता सेनानी वा गांधीवादी थे वह एक व्याख्याता, लेखक, भूविज्ञानी, शिक्षाविद, कृषक और एक बहुभाषाविद के रूप में भी थे। 


    Pingali Venkayya Image

    पिंगली वेंकैया के फल भी भारत के लिए ध्वज बनाए गए थे जो की आजादी के फल बनाए गए थे जो नीचे दिए गए फोटो में दर्शाए गए हैं।

    Evolution of India Flag

    राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की रूपरेखा 

    भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा एक क्षैतिज (horizontal) तिरंगा है जिसमें सबसे ऊपर गहरे केसरिया (केसरी), बीच में सफेद और सबसे नीचे गहरे हरे रंग का समान अनुपात है।  झंडे की चौड़ाई और उसकी लंबाई का अनुपात दो से तीन होता है।  सफेद पट्टी के केंद्र में एक गहरे नीले रंग का पहिया होता है जो चक्र को दर्शाता है। इसका डिज़ाइन उस पहिये का है जो अशोक के सारनाथ सिंह राजधानी के अबैकस पर दिखाई देता है।  इसका व्यास लगभग सफेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर है और इसमें 24 तीलियाँ हैं।

    भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में कौन सा रंग क्या दर्शाता है ?

    भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में 3 रंग होते हैं और एक अशोक चक्र होता है जो कि अलग-अलग संदेश देता है जिसे हमें समझना चाहिए।


    (1). केसरिया रंग (saffron colour) –

    राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में केसरिया रंग ताकत और साहस (strength and courage) को दर्शाता है। ये उस बलिदान का प्रतीक माना जाता है जो हमारे क्रांतिकारियों ने दिया था देश की आजादी के लिए।


    (2). सफेद रंग (white colour) –

    सफेद रंग राष्ट्रध्वज के मध्य में होता है जो शांति और सच्चाई (peace and truth) का संकेत देता है। यह सच्चाई और अमन का प्रतीक है जो हमे सच के रास्ते पर चलने के लिए और अमन (शांति) फैलने के लिए प्रेरित करता है।


    (3). हरा रंग (green colour) – 

    हरा अखरी पट्टी का रंग होता है जो भूमि की उर्वरता, वृद्धि और शुभता (fertility, growth and auspiciousness) को दर्शाता है। यह रंग भारत की उपजाऊ धरती और और किसानों को समर्पित होता है।


    (4) अशोक चक्र –

    चक्र यह संदेश देता है की गति में ही जीवन है और ठहराव मृत्यु इसलिए देश की तरक्की के लिए हमेशा आगे बढ़ते रहना यानी गति करना आवश्यक है। इस धर्म चक्र ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाई गई सारनाथ सिंह राजधानी में “कानून का पहिया” दर्शाया।


    झंडे के आकार का अनुपात

    राष्ट्रीय झंडा आकार में आयताकार होगा। झंडे की लंबाई और ऊंचाई (चौड़ाई) का अनुपात 3:2 होगा।


    राष्ट्रीय झंडे के मानक आकार निम्नलिखित हैं :-

    झंडे के आकार का अनुपात

    भारतीय झंडे से जुड़े नियम और कानून

    भारत में झंडा फहराने के नियम वा कानून भारतीय ध्वज सहित 2002 में उल्लेख किए गए है।

    इसके कुछ पॉइंट निम्न है।


    (1). झंडे पर किसी भी प्रकार के अक्षर नही लिखे जा सकते।


    (2). झंडे को कभी भी उल्टा यानी केसरिया रंग नीचे रख कर फहराने नही दिया जायेगा (ऐसा केवल राष्ट्रीय संकट की स्थिति में होता है)


    (3). छातिग्रस्त झड़े को नहीं फहराया जा सकता।


    (5). झंडे का प्रयोग इमारतों को ढकने के लिए नहीं किया जा सकता।


    (6). झंडे को किसी अन्य झंडे अथवा झंडों के साथ एक ही समय में एक ही ध्वज-दंड से नहीं फहराया जाएगा।


    (7). जब भी कभी राष्ट्रीय झंडा फहराया जाए तो उसकी स्थिति सम्मानपूर्ण और विशिष्ट होनी चाहिए।


    (9). झंडे को वाहन, रेलगाड़ी, नाव अथवा वायुयान के ऊपर, बगल अथवा पीछे से ढकने के काम मे नहीं लाया जाएगा।


    (10). साधारण जनता, किसी गैर-सरकारी संगठन अथवा विद्यालय के सदस्य राष्ट्रीय झंडे को सभी दिवसों और अवसरों, समारोहों अथवा अन्य अवसरों पर फहरा / प्रदर्शित कर सकते हैं। सम्मान व प्रतिष्ठा के अनुरूप नियमो का पालन करते हुए ।


    (11). जब झंडा किसी दीवार के सहारे, पट्ट और टेढ़ा फहराया जाए तो केसरिया भाग सबसे ऊपर रहना चाहिए और जब वह लम्बाई में खड़ा करके फहराया जाए, तो केसरी भाग झंडे के हिसाब से दाई ओर होगा (अर्थात् यह झंडे को सामने से देखने वाले व्यक्ति के बाई ओर होगा)


    (12). रैली या किसी यात्रा में अगर तिरंगा फहराया जा रहा है तो वहा उस रैली में सबसे आगे होना चाहिए।


    (13). रैली में चलते समय तिरंगा दाए (सीधे) हाथ में होना चाहिए।


    (14). किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचा या ऊपर या बराबर नहीं लगाया जाएगा और न ही पुष्प अथवा माला या प्रतीक सहित अन्य कोई दूसरी वस्तु उस ध्वज-दंड के ऊपर रखी जाएगी जिस पर झंडा फहराया जाता है।


    (15). किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचा या ऊपर या बराबर नहीं लगाया जाएगा और न ही पुष्प अथवा या प्रतीक जिस पर झंडा फहराया जाता है।


    (16). झंडे का इस्तेमाल सजावट के लिए बन्दनवानर गुच्छे अथवा पताका के रूप में या इसी प्रकार के किसी कामों के लिए नहीं किया जाएगा।


    (17). पेपर से बने झंडे का प्रयोग जनता द्वारा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसरों, संस्कृति और खेलकूद स्पर्धा पर फहराया जा सकता है परन्तु ऐसे कागज के झंडों को समारोह पूरा होने पश्चात् न तो विकृत किया जाएगा और न ही जमीन पर फेंका जाएगा। जहां तक सम्भव हो, ऐसे झंडों का निपटान पूरे गौरव के साथ और निजी तौर पर किया जाएगा।


    (18). झंडे को इस तरह से फहराया या बांधा न जाए जिससे कि वह ्षतिग्रस्त हो जाए,


    (19). जहां झंडे को खुले में फहराया जाना हो, जहां तक हो सके, उसे सूर्योदय से सूर्यास्त तक घराना फहराया जाना चाहिए।


    (20). राष्ट्रीय झंडा आकार में आयताकार होगा। झंडे की लंबाई और ऊंचाई (चौड़ाई) का अनुपात 3:2 होगा।


    (21). मोटर कारों पर झंडा फहराने का विशेषाधिकार केवल निम्नलिखित व्यक्तियों तक सीमित है :-

    • राष्ट्रपति
    • उप-राष्ट्रपति
    • राज्यपाल और उप-राज्यपाल
    • विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों / पोस्टों के अध्यक्ष उन देशों में जहां कि वे नियुक्त हों;
    • प्रधानमंत्री और अन्य केबिनेट मंत्री; केन्द्र के राज्यमंत्री और उपमंत्री; राज्यों अथवा संघ शासित क्षेत्रों में मुख्यमंत्री और अन्य केबिनेट मंत्री; राज्यों अथवा संघ शासित क्षेत्रों के राज्य मंत्री और उप मंत्री
    • अध्यक्ष, लोक सभा
    • भारत के मुख्य न्यायाधिपति, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधिपति, उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश।


    ऐसे कई सारे कानून है जो की भारतीय ध्वज सहित 2002 में दिए गए है इसमें सरकारी संथानो स्कूलों घरों आदि सभी जगह पर झंडा फहराने के नियम और कानून का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है आप नीचे दी गई Pdf में भारतीय ध्वज सहित 2002 को पड़ सकते है।  “भारतीय झंडा सहित

    (भारतीय झंडा सहित पीडीऍफ़ को पड़ने के लिए ऊपर लिखे हुए “भारतीय झंडा सहित” पर क्लिक करे )

    FAQ बार बार पूछे जाने वाले प्रश्न –


    (1). अशोक चक्र का रंग नीला ही क्यों होता है?
    उत्तर. नीला रंग आकाश, समुद्र और सार्वभौमिक सत्य का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए इसे नीला रखा गया है।

    (2).भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के डिजाइनर कोन है?
    उत्तर. भारत का राष्ट्र ध्वज पिंगली वेंकैया ने बनाया था।

    (3).सबसे पहले तिरंगा किसने फहराया था?
    उत्तर. भारत का प्रथम तिरंगा राष्ट्रध्वज भीखाजी कामा श्रीमती भीखाजी जी रूस्तम कामा (मैडम कामा) ने फहराया था ।

    (4). राष्ट्र ध्वज में अशोक चक्र किसका प्रतीक है?
    उत्तर. अशोक चक्र गति का प्रतीक है।

    (5). तिरंगे को सविधान सभा द्वारा कब अपनाया गया?
    उत्तर. 22 जुलाई 1947।

    निष्कर्ष –

    तिरंगा भारत को दर्शाता है हमे हमेशा इसका सम्मान करना चाहिए और इसके बनाए गए नियमो को मानना चाहिए लोगो को तिरंगे के प्रति जागरूक करना हम सभी भारतीय का कर्तव्य है इसलिए हमे तिरंगे से जुड़ी सही जानकारी सभी लोगो तक पहुंचना चाहिए इस आर्टिकल का यही मकसद था की भारतीयों को तिरंगे के बारे में और भी जानकारी मिले जिससे उन्हें इसके पीछे का मतलब भी समझ आ सके वहा इसका सम्मान कर सके और लोगो तक यह जानकारी वहुच सके।

    ‘आपका कोई और सवाल हो तो कमेंट बॉक्स के माध्यम से पूछ सकते है ‘

    धन्यवाद 🫶!

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